साइबर हमले में उत्तर कोरिया के हैकर समूह ‘ट्रेड टेरर’ का हाथ
कंपनी के एक इंजीनियर का लैपटॉप हैक होने की आशंका
संयुक्त अरब अमीरात से परिचालित दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरंसी एक्सचेंज बाइनेंस पर अब तक का सबसे बड़ा साइबर हमला हुआ है। हैकरों ने कंपनी से करीब 6.3 अरब डॉलर (लगभग 59 हजार करोड़ रुपए) की डिजिटल संपत्ति चुरा ली। यह इतिहास की सबसे बड़ी क्रिप्टो हैकिंग है। इसने क्रिप्टो बाजारों को पूरी तरह हिलाकर रख दिया है। साथ ही दुनिया भर में निवेशकों में डर का माहौल है। हाल के वर्षों में करोड़ों लोगों ने क्रिप्टोकरंसीज में निवेश किया है। इनमें भारतीय निवेशक भी शामिल हैं। घटना के तुरंत बाद एक्शन में आए बाइनेंस ने सुरक्षा एजेंसियों और ब्लॉकचेन ट्रैकरों की मदद से तीन अरब डॉलर के फंड को फ्रीज कर दिया है और सभी निकासी सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी हैं।
बाकी का क्या हुआ, इसकी जानकारी नहीं दी गई। कंपनी ने यह भी भरोसा दिया है कि वह खुद नुकसान की भरपाई करेगी। क्रिप्टो बाजार का विश्लेषण करने वाली कंपनियों के मुताबिक, इस हमले के पीछे उत्तर कोरिया के हैकर समूह ‘ट्रेड टेरर’ का हाथ है, जो चर्चित लाजारस ग्रुप से जुड़ा है। हैकरों ने करीब 20 मिनट के भीतर ज्यादातर रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी। बाइनेंस ने बताया कि ऐसी संभावना है कि कंपनी के एक इंजीनियर के लैपटॉप को हैक किया गया हो। इसके जरिए बिना अनुमति के डिजिटल संपत्तियां निकाल ली गईं।
इतिहास की सबसे बड़ी क्रिप्टो हैकिंग, दुनिया के सबसे बड़े एक्सचेंज से 59 हजार करोड़ रुपए उड़ाए
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इतिहास की सबसे बड़ी क्रिप्टो हैकिंग, दुनिया के सबसे बड़े एक्सचेंज से 59 हजार करोड़ रुपए उड़ाए
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